शुक्रवार, 24 मार्च 2017

वास्तु उपाय


बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार वास्तु दोषों के निराकरण हेतु तोड़-फोड़ से भवन के स्वामी को आर्थिक हानि तो होती ही है, साथ ही कीमती समय भी जाया होता है। इस तरह का निराकरण गृह स्वामी को कष्ट देने वाला होता है तथा व्यक्ति मानसिक रूप से टूट जाता है। इस आलेख में भवन को नुकसान पहुंचाए बिना वास्तु दोषों का निवारण करने के सरल उपायों का वर्णन किया गया है। पूर्व दिशा में बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोषों का निवारण- दोष : भवन की पूर्व दिशा का भाग अन्य दिशाओं की अपेक्षा ऊंचा होना। उपाय : उपरोक्त दोष निवारण के लिए भवन में टी.वी. का ऐन्टीना नैत्य कोण में लगा लें, जिसकी ऊंचाई भवन के पूर्वी एवं उत्तरी भाग की दीवारों से अधिक हो, ऐन्टीना के स्थान पर लोहे का एक पाइप या झंडा भी लगाया जा सकता है। भवन के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में ठोस वस्तुएं एवं उत्तरी-पूर्वी भाग में पोली वस्तुएं रख देनी चाहिए। दोष : भवन में यदि पूर्वी-उत्तरी भाग में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े घर का निर्माण हो गया है तो- उपाय : दूसरी मंजिल का निर्माण कराते समय उत्तरी एवं पूर्वी भाग को खाली छोड़ दें और जब तक निर्माण कार्य नहीं होता, तब तक के लिए पूर्वी एवं उत्तरी भाग का हिस्सा बिना सामान के खाली छोड़ दें। दोष : मुखय द्वार यदि आग्नेय में हो तो- उपाय : मुखय दरबाजे पर गहरे लाल रंग का पेन्ट करने तथा दरबाजे पर लाल रंग के पर्दे लगाने से इस दोष का निवारण हो जाता है। दरवाजे पर बाहर की ओर सूर्य का चित्र लगा दें। पूर्व आग्नेय कोण में स्थित दरवाजे को बंद रखें। ईशान कोण में मुखय वास्तु दोष एवं बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोषों के निवारण के उपाय : दोष : र्इ्रशानोन्मुख भूखंड की उत्तरी दिशा में ऊंची इमारत या भवन हो तो- उपाय : उपरोक्त वास्तु दोष को दूर करने के लिए उत्तर-दिशा वाली ऊंची इमारत और भवन के बीच एक मार्ग बना देना चाहिए अर्थात् मार्ग के लिए खाली जगह छोड़ दें। इससे ऊंची इमारत के कारण जो वेध उत्पन्न हो रहा है, उसके एवं भूखंड के बीच मार्ग बन जाने से वास्तु दोष या वेध दोष का निवारण स्वतः ही हो जाएगा। दोष : ईशानोन्मुख भूखंड पर पूर्व व उत्तर दिशा की चार दीवारी से सटाकर एवं पश्चिम व दक्षिण दीवार से हटकर भवन होने से- उपाय : इस स्थिति में पूर्व या उत्तर दिशा के लिए निर्माण का कम से कम प्रयोग करें और इस भाग को हमेशा साफ एवं शुद्ध रखें। इसके साथ ही भूखंड के नैत्य कोण में अनुपयोगी एवं भारी वस्तुओं का ढेर बनाकर रखें। दोष : ईशान कोण में कूड़ा-कचरा आदि का ढेर हो तो- उपाय : इसका सबसे सरल उपाय है कि ईशान कोण पर लगे ढेर को साफ करवाकर उस स्थान को स्वच्छ एवं पवित्र रखें। दोष : ईशान कोण में रसोई घर होना- उपाय : इस स्थिति में रसोई घर के अंदर गैस चूल्हे को आग्नेय कोण में रख दें और रसोई के ईशान कोण में जल भरकर रखें। दोष : ईशान कोण में शौचालय हो तो- उपाय : इस स्थिति में शौचालय का प्रयोग बंद कर दें अथवा शौचालय की बाहरी दीवार पर एक बड़ा आदमकद शीशा लगा दें। शौचालय की दीवार पर शिकार करता हुआ शेर का चित्र भी लगाया जा सकता है या फिर शौचालय के बाहर ऐसे मिट्टी के पात्र जिन पर कटावदार आलेखन आदि निर्मित हों, को रखा जा सकता है। क्योंकि ईशान कोण में शौचालय होना अत्यंत अशुभ फलदायक है। उत्तरोन्मुखी भूखंड के वास्तु दोषों का निवारण : दोष : इस भूखंड पर बनाए गये घर उत्तरी भाग उन्नत होना। उपाय : इस दोष के निवारण हेतु दक्षिण भाग को ऊंचा करने के लिए टी.वी. का ऐन्टीना, झंडा या लोहे का रॉड उत्तरी भाग से ऊंचा लगा दें तथा साथ ही घर में भारी सामान दक्षिण दिशा में ही रखें। छत के ऊपर रखी जाने वाली पानी की टंकी को भी दक्षिण दिशा में ही रखें। दोष : भूखंड की पूर्व दिशा में टीले अथवा ऊंचा मकान हो तो- उपाय : उत्तर-दिशा में स्थित इन वेधों एवं भूखंड के बीच एक सार्वजनिक मार्ग बना दे। वायव्योन्मुख भूखंड के वास्तु दोष एवं उनका निवारण- दोष : यदि इस भूखंड पर बने घर में मुखय द्वार उत्तर दिशा में हो तथा दक्षिण और पश्चिम दिशा में दरवाजे हों तो- उपाय : इस दशा में वायव्य कोण व आग्नेय कोण में विस्तार की भूमि को अनुपयोगी छोड़ दें तथा दक्षिण दरवाजे का प्रयोग तुरंत बंद कर दें। दोष : वायव्य दिशा में रसोई घर हो तो- उपाय : इस दशा में वायव्य कोण में स्थित रसोई के आग्नेय कोण में गैस चूल्हा रख देना चाहिए। इसके साथ ही घर में अन्नादि के डिब्बे वायव्य कोण में रख देना चाहिए। पश्चिमोन्मुख भूखंड के वास्तु दोषों का निवारण- दोष : इस भूखंड के पश्चिम दिशा के दरवाजे का मुख नैत्य कोण में होने पर- उपाय : इस दरवाजे पर काले रंग का पेन्ट करवा दें तथा दरवाजे के समक्ष एक आदमकद आईना इस प्रकार लगवाएं कि प्रवेश करने वाले व्यक्ति को उसका प्रतिबिम्ब अवश्य दिखाई दे। दोष : घर में प्रयोग किया गया जल अथवा वर्षा का पानी पश्चिम से बाहर निकलता हो तो- नैत्योन्मुख भूखंड के मुखय वास्तु दोष एवं उनके निवारण के उपाय : दोष : यदि इस भूखंड में बनाए गये भवन-कक्षों व बरामदों में ठोस भारी वस्तुएं नैत्य कोण का नीचा होना : उपाय : इस दशा में इन कमरों के अंदर व बरामदों में ठोस भारी वस्तुएं रखे कक्षों को धोते समय जल को नैत्य से ईशान की ओर लाएं एवं पूर्व, उत्तर अथवा ईशान को स्थित दरबाजे से बाहर निकलें। दोष : नैत्य कोण में खिड़की होना - उपाय : इस दशा में खिड़की को बंद कर उसके ऊपर गहरे हरे रंग का पर्दा डाल देना चाहिए। दक्षिणोन्मुख भूखंड के वास्तु दोष एवं उनका निवारण : दोष : इस भूखंड के सम्मुख भाग में कुंआ हो तो- उपाय : ऐसी स्थिति में कुएं को बंद कर देना चाहिए/अथवा कुएं पर मोटी एवं भारी स्लैब डालकर उसे ऊपर से पाट देना चाहिए। आग्नेयोन्मुख भूखंड के वास्तु दोष एवं उनके निवारण के उपाय : दोष : आग्नेय कोण में मुखय द्वार होने पर - उपाय : इस दरबाजे को अधिकतर बंद ही रखना चाहिए। इसके साथ ही दरवाजे पर गहरे लाल रंग का पेन्ट करवा देने से वास्तु दोष समाप्त हो जाता है। दोष : इस प्रकार के भूखंड में दक्षिणी आग्नेय में गेट होने पर - उपाय : इस दरवाजे को अधिकतर बंदर रखें तथा दरवाजे पर काले रंग का पेन्ट करा देना चाहिए। बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोषों का शत-प्रतिशत नहीं तो 70 से 80 प्रतिशत तक सुधार किया जा सकता है तथा यह उपाय ज्यादा श्रम साध्य एवं महंगे भी नहीं हैं अतः कोई भी इसे आसानी से अमल में ला सकता है। आशा है आप इससे अपने वास्तु दोषों का निवारण कर सकेंगे और अपने जीवन को सुखमय एवं शांतिमय से गुजार सकेंगे।mantartantrasamadhan@gmail.com




शुक्रवार, 10 मार्च 2017

नवग्रह शांति उपाय

नवग्रह शांति उपाय:-संसार में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी ग्रह से पीड़ित है। हर व्यक्ति धन-धान्य संपन्न भी नहीं है। ग्रह-पीड़ा के निवारण के लिए निर्धन एवं मध्यम वर्ग का व्यक्ति दुविधा में पड़ जाता है। यह वर्ग न तो लंबे-चौड़े यज्ञ, हवन या अनुष्ठान करवा सकता है, न ही हीरा, पन्ना, पुखराज जैसे महंगे रत्न धारण कर सकता है। ज्योतिष विद्या देव विद्या है। यदिज्योतिषियों के पास जाएं तो वे प्रायः पुरातन ग्रंथों में से लिए गए उपाय एवं रत्न धारण करने की सलाह दे देते हैं। परंतु आजकल लोग अनुभव सिद्ध एवं व्यवहारिक उपाय चाहते हैं ताकि आम व्यक्ति, जन सामान्य एवं पीड़ित व्यक्ति लाभ उठा सकें।
ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं- जिसमें लाल किताब के अनुसार व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपाय बताए गए हैं।

पाराशर एस्ट्रोलॉजी के अनुसार :

1. सूर्य ग्रहों का राजा है। इसलिए देवाधिदेव भगवान् विष्णु की अराधना से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य को जल देना, गायत्री मंत्र का जप करना, रविवार का व्रत करना तथा रविवार को केवल मीठा भोजन करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य का रत्न 'माणिक्य' धारण करना चाहिए परंतु यदि क्षमता न हो तो तांबे की अंगूठी में सूर्य देव का चिह्न बनवाकर दाहिने हाथ की अनामिका में धारण करें (रविवार के दिन) तथा साथ ही सूर्य के मंत्र का 108 बार जप करें।
ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
2. ग्रहों में चंद्रमा को स्त्री स्वरूप माना है। भगवान शिव ने चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया है। चंद्रमा के देवता भगवान शिव हैं। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं व शिव चालीसा का पाठ करें। 16 सोमवार का व्रत करें तो चंद्रमा ग्रह द्वारा प्रदत्त कष्ट दूर होते हैं। रत्नों में मोती चांदी की अंगूठी में धारण कर सकते हैं। चंद्रमा के दान में दूध, चीनी, चावल, सफेद पुष्प, दही (सफेद वस्तुओं) का दान दिया जाता है तथा मंत्र जप भी कर सकते हैं।
ऊँ सों सोमाय नमः
3. जन्मकुंडली में मंगल यदि अशुभ हो तो मंगलवार का व्रत करें, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करें। मूंगा रत्न धारण करें या तांबे की अंगूठी बनवाकर उसमें हनुमान जी का चित्र अंकितकर मंगलवार को धारण कर सकते हैं। स्त्रियों को हनुमान जी की पूजा करना वर्जित बताया गया है। मंगल के दान में गुड़, तांबा, लाल चंदन, लाल फूल, फल एवं लाल वस्त्र का दान दें।
ऊँ अं अंगारकाय नमः
4. ग्रहों में बुध युवराज है। बुध यदि अशुभ स्थिति में हो तो हरा वस्त्र न पहनें तथा भूलकर भी तोता न पालें। अन्यथा स्वास्थ्य खराब रह सकता है। बुध संबंधी दान में हरी मूंग, हरे फल, हरी सब्जी, हरा कपड़ा दान-दक्षिणा सहित दें व बीज मंत्र का जप करें।
ऊँ बुं बुधाय नमः
5. गुरु : गुरु का अर्थ ही महान है- सर्वाधिक अनुशासन, ईमानदार एवं कर्त्तव्यनिष्ठ। गुरु तो देव गुरु हैं। जिस जातक का गुरु निर्बल, वक्री, अस्त या पापी ग्रहों के साथ हो तो वह ब्रह्माजी की पूजा करें। केले के वृक्ष की पूजा एवं पीपल की पूजा करें। पीली वस्तुओं (बूंदी के लडडू, पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल, पीले फल) आदि का दान दें। रत्नों में पुखराज सोने की अंगूठी में धारण कर सकते हैं व बृहस्पति के मंत्र का जप करते रहें।
ऊँ बृं बृहस्पतये नमः
6. शुक्र असुरों का गुरु, भोग-विलास, गृहस्थ एवं सुख का स्वामी है। शुक्र स्त्री जातक है तथा जन समाज का प्रतिनिधित्व करता है। जिन जातकों का शुक्र पीड़ित करता हो, उन्हें गाय को चारा, ज्वार खिलाना चाहिए एवं समाज सेवा करनी चाहिए। रत्नों में हीरा धारण करना चाहिए या बीज मंत्र का जप करें।
ऊँ शुं शुक्राय नमः
7. सूर्य पुत्र शनि, ग्रहों में न्यायाधीश है तथा न्याय सदैव कठोर ही होता है जिससे लोग शनि से भयभीत रहते हैं। शनि चाहे तो राजा को रंक तथा रंक को राजा बना देता है। शनि पीड़ा निवृत्ति हेतु महामृत्युंजय का जप, शिव आराधना करनी चाहिए। शनि के क्रोध से बचने के लिए काले उड़द, काले तिल, तेल एवं काले वस्त्र का दान दें। शनि के रत्न (नीलम) को धारण कर सकते हैं।
ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
8. राहु की राक्षसी प्रवृत्ति है। इसे ड्रेगन्स हैड भी कहते हैं। राहु के दान में कंबल, लोहा, काले फूल, नारियल, कोयला एवं खोटे सिक्के आते हैं। नारियल को बहते जल में बहा देने से राहु शांत हो जाता है। राहु की महादशा या अंतर्दशा में राहु के मंत्र का जप करते रहें। गोमेद रत्न धारण करें।
ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
9. केतु राक्षसी मनोवृत्ति वाले राहु का निम्न भाग है। राहु शनि के साथ समानता रखता है एवं केतु मंगल के साथ। इसके आराध्य देव गणपति जी हैं। केतु के उपाय के लिए काले कुत्ते को शनिवार के दिन खाना खिलाना चाहिए। किसी मंदिर या धार्मिक स्थान में कंबल दान दें। रत्नों में लहसुनिया धारण करें।
ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः

दान मुहूर्त

1. सूर्य का दान : ज्ञानी पंडित को रविवार दोपहर के समय।
2. चंद्र का दान : सोमवार के दिन, पूर्णमासी या एकादशी को नवयौवना स्त्री को देना चाहिए।
3. मंगल का दान : क्षत्रिय नवयुवक को दोपहर के समय।
4. बुध का दान : किसी कन्या को बुधवार शाम के समय।
5. गुरु का दान : ब्राह्मण, ज्योतिषी को प्रातः काल।
6. शुक्र का दान : सायंकाल के समय नवयुवती को।
7. शनि का दान : शनिवार को गरीब, अपाहिज को शाम के समय।
8. राहु का दान : कोढ़ी को शाम के समय।
9. केतु का दान : साधु को देना चाहिए।
नवग्रह शांति के अनुभवसिद्ध सरल उपाय : सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए रविवार को प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें तथा जल में लाल चंदन घिसा हुआ, गुड़ एवं सफेद पुष्प भी डाल लें तथा साथ ही सूर्य मंत्र का जप करते हुए 7 बार परिक्रमा भी कर लें।
चंद्र ग्रह के लिए हमेशा बुजुर्ग औरतों का सम्मान करें व उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। चंद्रमा पानी का कारक है। इसलिए कुएं, तालाब, नदी में या उसके आसपास गंदगी को न फैलाएं। सोमवार के दिन चावल व दूध का दान करते रहें।
मंगल के लिए हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाएं, मंगलवार के दिन सिंदूर एवं चमेली का तेल हनुमान जी को अर्पण करें। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। यह प्रयोग केवल पुरुष ही करें।
बुध ग्रह के लिए तांबे का एक सिक्का लेकर उसमें छेद करके बहते पानी में बहा दें। बुध को अपने अनुकूल करने के लिए बहन, बेटी व बुआ को इज्जत दें व उनका आशीर्वाद लेते रहें। शुभ कार्य (मकान मुर्हूत) (शादी-विवाह) के समय बहन व बेटी को कुछ न कुछ अवश्य दें व उनका आशीर्वाद लें। कभी-कभी (नपुंसक) का आशीर्वाद भी लेना चाहिए।
बृहस्पति ग्रह के लिए बड़ों का दोनों पांव छूकर आशीर्वाद लें। पीपल के वृक्ष के पास कभी गंदगी न फैलाएं व जब भी कभी किसी मंदिर, धर्म स्थान के सामने से गुजरें तो सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर जाएं। बृहस्पति के बीज मंत्र का जप करते रहें।
शुक्र ग्रह यदि अच्छा नहीं है तो पत्नी व पति को आपसी सहमति से ही कार्य करना चाहिए। व जब घर बनाएं तो वहां कच्ची जमीन अवश्य रखें तथा पौधे लगाकर रखें। कच्ची जगह शुक्र का प्रतीक है। जिस घर में कच्ची जगह नहीं होती वहां घर में स्त्रियां खुश नहीं रह सकतीं। यदि कच्ची जगह न हो तो घर में गमले अवश्य रखें जिसमें फूलों वाले पौधे हों या हरे पौधे हों। दूध वाले पौधे या कांटेदार पौधे घर में न रखें। इससे घर की महिलाओं को सेहत संबंधी परेशानी हो सकती है।
शनि ग्रह से पीड़ित व्यक्ति को लंगड़े व्यक्ति की सेवा करनी चाहिए। चूंकि शनि देव लंगड़े हैं तो लंगड़े, अपाहिज भिखारी को खाना खिलाने से वे अति प्रसन्न होते हैं।
राहु ग्रह से पीड़ित को कौड़ियां दान करें। रात को सिरहाने कुछ मूलियां रखकर सुबह उनका दान कर दें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को भी चाय के लिए पैसे देते रहें। केतु ग्रह की शांति के लिए गणेश चतुर्थी की पूजा करनी चाहिए। कुत्ता पालना या कुत्ते की सेवा करनी चाहिए (रोटी खिलाना)।
केतु ग्रह के लिए काले-सफेद कंबल का दान करना भी फायदेमंद है। केतु-ग्रह के लिए पत्नी के भाई (साले), बेटी के पुत्र (दोहते) व बेटी के पति (दामाद) की सेवा अवश्य करें। यहां सेवा का मतलब है जब भी ये घर आएं तो इन्हें इज्जत दें।
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गुरुवार, 9 मार्च 2017

शत्रु स्तंभन मंत्र

मंत्र:- ॐ नमो कामरूप देश कामाख्या देवी, जल बांधू जलवायु बांधू ,बांधू जल के तीर पांचो दूत कलवा बांधू,बाधूं हनुमंत वीर सहदेव की अनुवा अर्जुन का बाण, रावण रण थाम ले नहीं तो हनुमत की आन, शब्द सांचा पिंड काँचा गुरु मेरे का इल्म सांचा।।






विधि- इस मंत्र की नित्य एक माला 21 दिन तक जपे तो मंत्र सिद्ध हो।
लाभ- काले उड़द मंत्र कर............…..........................।
अधिक जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पोस्ट पर संपर्क करें या हमें ईमेल करें हमारा ईमेल id है।
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निंद्रा मंत्र

निंद्रा  आने का मंत्र:- ॐ शुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिंद्रे स्वाहा।।



विधि- एक माला जाप सोने से पहले नित्यप्रति जपे।
लाभ- इस मंत्र से अनिंद्रा की बीमारी दूर होकर अच्छी नींद आती है।





बुधवार, 8 मार्च 2017

रामायण चौपाई मंत्र

हनुमान जी के दर्शन हेतु चौपाई मंत्र:- कहइ रीछपति सुनु हनुमाना, का चुप साधि रहेहु बलवाना। पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना।।



विधि- इस चौपाई का संपुट लगाकर रामचरितमानस का 9 पाठ करने से हनुमान जी की कृपा और दर्शन प्राप्त होते हैं।
लाभ- इस मंत्र द्वारा बल बुद्धि विद्या की प्राप्ति होती है हनुमान जी की कृपा  दर्शन प्राप्त होते हैं!



मंगलवार, 7 मार्च 2017

तेल मोहिनी मंत्र

मंत्र:- कच्चा तेल तेल की घाणी, तेल कर हकीकत न्यारी राजा मोहूं, प्रजा मोहूं, मोहूं नगरी सारी, डूंगर चढ़ता मर्गा मोहूं, तो रंडी की कौन विचारी, मेरी मोही न मोहे तो, तखत सुलेमान का चाक उल्टा फिरै।।



विधि- तिल का तेल लेवे कच्ची घानी का ले, जिसमे खीरा या अग्नि न लगा हो। कांच की शीशी में डालें 21 दिन तक एक माला नित्य  हनुमान जी के के मंदिर में जपै। गूगल धूप गाय के घी का दीपक जप करते समय जलाएे।
लाभ- अधिक जानकारी के लिए व पूरी विधि जानने के लिए हमारे ब्लॉग पर पोस्ट करें या हमारी ईमेल id पर संपर्क करें।






भविष्य-दर्शन शिव मंत्र

मंत्र:- ॐ अजाय त्रिनेत्राय पिंगलायै महात्मे वामाय विश्वरूपाय स्वपनाधिपत्ये नमः स्वपने कथय मैं कथयम् सर्व कार्य अवशेषत्, क्रिया सिद्धि सट्टा सिद्धि विद्या स्वामी तवत् प्रसादात् महेश्वर:।।




विधि- शुक्ल पक्ष के सोमवार से नित्य शिवलिंग को कच्चा दूध जिसमें गोघृत मिला कर स्नान करावे। वह इस मंत्र की पांच माला का जाप करें 21 दिन तक नित्य यह क्रिया करें। गूगल धूप अगरबत्ती गाय के घी का दीपक जला वे तो मंत्र सिद्ध हो।
लाभ- इस मंत्र द्वारा आप भविष्य में होने वाली घटनाओं शेयर बाजार सट्टा आदि का पता लगा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पर पोस्ट करें या हमारी ईमेल id पर संपर्क करें।



धूल मोहिनी मंत्र

मंत्र:- धूल -धूल तू धूल की रानी, जगमोहन सुन  मोरी वाणी, जल से धूला आन पढूं,तब.........................., "अमुकी" अंग आकर लगे ईश्वर गोरा पार्वती की आन, गुरु गोरखनाथ की दुहाई।।




विधि- शनिवार से रात्रि के समय घी का दीपक जला कर दो अगरबती जलाकर रात्रि 11:00 बजे से 1:00 बजे तक मंत्र का जप करें सात शनिवार जपै तो मंत्र सिद्ध हो।
लाभ- इस मंत्र द्वारा स्त्री वशीकरण होता है वह स्त्री सदा आपकी प्रियतमा बनकर रहती है। यह प्रयोग उन व्यक्तियों के लिए है जिनमें पति पत्नी में तलाक की नौबत आ रही है।इस मंत्र प्रयोग द्वारा आप अपनी पत्नी को अपना बना सकते हैं और सुखपूर्वक गृहस्थी जीवन जी सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप  अपना कमेंट पोस्ट करें। इस मंत्र को मैंने अधूरा लिखा है ताकि कोई गलत व्यक्ति इसका प्रयोग ना कर सके पूरा मंत्र जानने के लिए आप हमारे ब्लॉग पर संपर्क करें।

आप हमारी ईमेल id पर भी संपर्क कर सकते हैं- 

सोमवार, 6 मार्च 2017

भैरव सिद्धि साधना मंत्र

मंत्र:- ॐ काला भैरव अकराल भैरव काशी का कोतवाल भैरव राजा सुमिरे राज को मैं सुमिरु मेरे काज को भोर की गद्दी लाज को हाजिर हो हाजिर हो सत्य नाम आदेश गुरु का।।
विधि- एकांत में गाय के गोबर से त्रिकोण लिपे, फिर उस पर काला उड़द  साबूत रखे उड़द के ऊपर चौमुखा तिल का तेल का दीपक जलाये भैरो जी को पूजा दे शराब की बोतल दे। जप का समय रात्रि 11:00 बजे 11 माला नित्य 11 दिन तक करें ।
लाभ- अधिक जानकारी के लिए ब्लॉग पर पोस्ट करें।


बिच्छू विष निवारण मंत्र

मंत्र:- काला बिच्छु कोत्तर वाला, हरि पाख सोना का नाडा़, खेरें बिच्छू थारी जात,म जन्मयों मावस की रात,चढ़ तो मारू उत्तरं तो उतारू नहीं उतरे तो माता अंजनी का पिया दूध हलाल से हराम करें।।




विधि- होली दशहरा दिवाली की रात्रि में इस मंत्र की 5 माला जाप करें तो सिद्धि मिले। गूगल धूप दीपक जलता रहे वह जप के अंत में अग्नि पर दो लोग एक पतासे का भोग लगाए ।।
लाभ- इस मंत्र द्वारा नीम के पत्तों की डाली से 21 बार झाड़ा लगाने से बिच्छू का जहर उतर जाता है।



रविवार, 5 मार्च 2017

काली माता दर्शन मंत्र


काली माता दर्शन मंत्र:- ॐ काली काली महाकाली पी प्याला हो मतवाली खंजर खपर लेकर चाली सहस्त्र बलाय का भक्षण करने वाली सर्व दुश्मनों का भक्षण करने वाली सर्व भूत-प्रेतों का भक्षण करने वाली भक्तों की तुम हो रखवाली आद काली जुगाद कर्म कल्याणी हाजिर स्वाहा। गुरु की शक्ति मेरी भक्ति शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वरो वाचाा।।




विधि- नवरात्रि में नित्य 10 माला लोबान खेंकर करें प्रति मंत्र लोबान जलाएं मां काली का दर्शन होवें।
लाभ- इस मंत्र को सिद्ध करने पर आपको सर्व सिद्धि की प्राप्ति होती है।



हाजरात(कजली) मंत्र

हाजरात(कजली) मंत्र:- बाजी आयो बाज खेलबा, छती बड़ की छाया,बाधूं थार कडा़ घुघरूं बांधो थारी काया।।





विधि- गूगल धूप घी का दीपक जलाकर होली की रात्रि में इस मंत्र की 10 माला जाप करें तो मंत्र सिद्ध हो ।



लाभ-  इस मंत्र द्वारा आप खोई हुई वस्तु,गुमशुदा हुए व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हो। अधिक जानकारी के लिए हमारी ईमेल id यह  ब्लॉग पोस्ट पर संपर्क करें।

मोहिनी तंत्र प्रयोग

हनुमान लौंग माला मोहिनी तंत्र प्रयोग:- शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी को तुलसी के 108 पत्तों की माला पहनाए ।जिस पर लाल चंदन से राम नाम लिखे।  गुडे चने का भोग लगाएं घी का दीपक जलाकर 36 पाठ संकटमोचन की करें। इस विधान को आठवीं दोहे का संपुट लगाकर करें दूसरे दिन रविवार को हनुमानजी को 108 लौंग की माला पहनावे। वह  उसी प्रकार 36 पाठ करें तीसरे दिन सोमवार को 108 सफेद आक के फूलों की माला पहनावे व 36 पाठ करें अंत में लौंग माला तैयार हो जाएगी। इससे सर्वजन वशीकरण वह मोहन होगा । इस सिद्धि लोंग माला को धारण कर मुकदमे वाद विवाद राजनीति भाषण कथा प्रवचन करने से, सर्व जगत का वशीकरण व मोहन होता है।

नोट- संकल्प में सर्वजन वशीकरण के बारे में सोचे।  ब्रम्हचारी व्रत  का पालन करें।

हनुमान मंत्र साधना

हनुमान मंत्र साधना:- शुभ कर्म- मंगल करण- विघ्न हरण सुमिरू श्री पवन कुमार, दास हाथ जोड़कर पुकारता जल्द संभालो आय।।



विधि- चैत्र की नवरात्रि में 9 दिन तक  इस मंत्र की 11 माला जपे तो मंत्र सिद्ध होता है।
लाभ- इस मंत्र को सिद्ध होने के बाद नित्य प्रति एक माला जप करने से आपके सारे विघ्न-बाधाओं का नाश होता है वह श्री हनुमान जी महाराज की कृपा दृष्टि आप के ऊपर सदा बनी रहती है।




रक्षा कवच

मंत्र:- ॐ परब्रह्मा परमात्मने:  मम् शरीरम् रक्षां कुरु कुरु स्वाहा।।



विधि- इस मंत्र  को नवरात्रि में 10,000 जप करें तो मंत्र सिद्ध होता है। जप करते समय घी का दीपक व गूगल धूप अगरबत्ती जलती रहनी चाहिए।
लाभ- सुबह घर से निकलते वक्त इस मंत्र को 7 बार जप करें वह शरीर के तीन फूंक लगाकर घर से निकले तो इस मंत्र द्वारा आपकी भूत-प्रेत ऊपरी पराई तंत्र- मंत्र- यंत्र एक्सीडेंट आदि से आपकी सुरक्षा होती है।





 रक्षा कवच मंत्र:- ॐ बजर-बजर,बजर की बाड़,बजर पर बाधूँ दशो दीवार,देश दवार की घोल घाट,उलट पडे़ बादी की खाट,पहली चौकी गणपति जी की, दूजी चोकी भैरूं जी की, तीजी चौकी गुरु गोरखनाथ की, चौथी चौकी बजरंगबली की ..........................,, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।।




विधि- पूरा मंत्र और विधि जानने के लिए ब्लॉग पर संपर्क करें।
लाभ- यह  मंत्र मेरे द्वारा परीक्षित है मैंने इस मंत्र द्वारा स्वयं की रक्षा का कवच तैयार किया है तथा साथ ही में इस मंत्र द्वारा अभिमंत्रित  रक्षा (कडा़)जिस किसी को भी अभिमंत्रित करके दिया है उसको तंत्र मंत्र , ऊपरी पराई भूत प्रेत जिन्न जिन्नात डाकिनी शाकिनी नजर दोष द्वारा उसको सभी तरफ से सुरक्षा प्राप्त हुई है।।





रक्षा कवच मंत्र:- तांबा की जमीन लोहे की फाण, कीले-कीले जागता मसान, कीले मेरे गुरु को भी कीले,कीलन-कीलन हो रही मेरे गुरु को भी कील बागरास बागणी, कपाल राज जोगनी नाहरसिंह की चौकी कंठो की कालका ईश्वर की कुंजी ब्रह्मा का ताला गौरा पार्वती बैठी रखवाली मेरे पिंड की बैठी गौरा पार्वती रखवाली शब्द सांचा पिंड काँचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।।




विधि- इसकी विधि जानने के लिए ब्लॉग पर या ईमेल id पर संपर्क करें।
लाभ- इस मंत्र प्रयोग द्वारा आपकी और आपके परिवार की सभी बाधाओं से सुरक्षा होती है।




सर्वकामनापूर्ति श्रीकाली चैटक मंत्र

  मंत्र - ॐ कंकाली महाकाली केलि कलाभ्याम स्वाहा !! विधान -शुभ दिन से प्रारम्भ करें! ब्राम्हचार्य व्रत का पालन करते हुए,काला आसान और काले रंग...