मंगलवार, 27 अगस्त 2019

गायत्री मंत्र की महिमा


*🙏गायत्री मंत्र का जप करने वाले को मिलते हैं ये 10 वरदान- हो जाती है समस्याएं दूर🙏*

*🚩ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् ।।" इस वेद मंत्र गायत्री महामंत्र के बारे में सारे वेद, पुराण, धर्म शास्त्रों में एक मत से कहा हैं कि जो कोई भी नियमित सूर्योदय के 2 घंटे पहले से लेकर सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक उगते सूर्य का ध्यान करते हुये जप करता हैं उसके जीवन के सारे अभाव तो दूर हो ही जाते हैं, साथ मां गायत्री की कृपा से जप करने वाले साधक को ये 10 वरदान स्वतः ही मिलने लगते हैं । शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र को वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र बताया गया है । इसके जप के लिए तीन समय बताए गए हैं । गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से 2 घंटे पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए । दूसरा समय है दोपहर का- दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है, और तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए*

*🌷1- पहला वरदान- हर परेशानी हो जाती है दूर- नियमित गायत्री मंत्र का जप करने वाले साधक के जीवन की सभी समस्याएं, परेशानियां हमेशा के लिए खत्म हो जाती हैं*

*🌷2- दूसरा वरदान- गायत्री मंत्र का जप करते समय अगर सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का ध्यान करते हुये भाव करे की परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित कर रहा है । इससे साधक के जीवन में कभी कभी अंधकार प्रवेश नही कर पाता*


*🌷3- तीसरा वरदान- यदि किसी रोग से मुक्ति जल्दी चाहते हैं तो किसी भी शुभ मुहूर्त में एक कांसे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर रख लें एवं उसके सामने लाल आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के साथ 'ऐं ह्रीं क्लीं' का संपुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें । जप के पश्चात जल से भरे पात्र का सेवन करने से गंभीर से गंभीर रोग का नाश होता है । यही जल किसी अन्य रोगी को पीने देने से उसका रोग भी नाश होता हैं*

*🌷4- चौथा वरदान- विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र बहुत लाभदायक है । रोजाना इस मंत्र का 108 बार जप करने से विद्यार्थी को सभी प्रकार की विद्या प्राप्त करने में आसानी होती है । पढऩे में मन लगने लगता है, एक बार में ही पढ़ा हुआ याद हो जाता हैं*

*🌷5- पांचवां वरदान- व्यापार, नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिलती, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो गायत्री मंत्र का जप करे शीघ्र लाभ होगा । इसके साथ ही रविवार को अस्वाद व्रत भी रखे*

*🌷6- छटवां वरदान- किसी भी शुभ मुहूर्त में दूध, दही, घी एवं शहद को मिलाकर 1000 गायत्री मंत्रों के साथ हवन करने से चेचक, आंखों के रोग एवं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं । इसमें समिधाएं पीपल की होना चाहिए । गायत्री मंत्रों के साथ नारियल का बुरा एवं घी का हवन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है । नारियल के बुरे मे यदि शहद का प्रयोग किया जाए तो सौभाग्य में वृद्धि होती है*


*🌷7- सातवां वरदान- शत्रुओं के कारण परेशानियां झेल रहे हैं तो मंगलवार, अमावस्या अथवा रविवार को लाल वस्त्र पहनकर माता दुर्गा का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र के आगे एवं पीछे 'क्लीं' बीज मंत्र का तीन बार सम्पुट लगाकार 108 बार रोज जप करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी* ।

*🌷8- आठवां वरदान- यदि विवाह में देरी हो रही हो तो सोमवार को सुबह के समय पीले वस्त्र धारण कर माता पार्वती का ध्यान करते हुए 'ह्रीं' बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर 108 बार जाप करने से विवाह कार्य में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होती हैं । यह साधना स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं* ।


*🌷9- नवां वरदान- जो भी व्यक्ति गायत्री मंत्र का नियमित जप करता हैं उसकी त्वचा में स्वतः ही चमक आने लगती है । नेत्रों में तेज आता है, अनेक सुक्ष्म सिद्धि प्राप्त होती है, क्रोध शांत होता है एवं दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है*।

*🌷10- दसवां वरदान- अगर किसी दंपत्ति को संतान सुख नहीं मिल रहा हो तो पति-पत्नी दोनों 1 माह तक सूर्योदय से पूर्व 1100 बार संतान प्राप्ति की कामना से गायत्री मंत्र का जप 'यौं' बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर करें, जप के समय दोनों सफेद वस्त्र ही धारण*
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 *अधिक जानकारी के लिए व वास्तु का ज्योतिष संबंधी कार्यों के लिए संपर्क करें*
 *राष्ट्रीय धर्माचार्य पंडित जगदीश भारद्वाज*
 *दुर्गा उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*
*mantartantrasamadhan@gmail.com
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सोमवार, 26 अगस्त 2019

जानिए की आपकी राशि से अनुसार कौनसा बिज़नेस करें


*जानिए की आपकी राशि से  अनुसार कौनसा बिज़नेस करना बेहतर है-*

*मेष- (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ*)/—-

*राशि चक्र की सबसे प्रथम राशि मेष है। जिसके स्वामी मंगल है। धातु संज्ञक यह राशि चर (चलित) स्वभाव की होती है।  इस राशि के जातक निर्णय लेने में जल्दबाजी करते है तथा जिस कार्य को हाथ में लिया है उसको पूरा किए बिना पीछे नहीं हटते। इनका स्वभाव कभी-कभी विरक्ति का भी रहता है। लालच करना इस राशि के लोगों के स्वभाव मे नहीं होता। दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है। इनमें कल्पना शक्ति की प्रबलता रहती है।*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस– मेष राशि के लोगों को गणित, फिजिक्स, अकाउंट आदि विषयों में अधिक सफलता मिलती है। उन्हें सेना, आर्किटेक्ट, अस्त्र-शस्त्र, वास्तुशास्त्र में कॅरियर या इनसे जुड़े सेक्टर में बिज़नेस करना चाहिए। इनमें सफलता की अधिक संभावना रहती है। मंगल के साथ सूर्य की यूति हो तो सरकारी क्षेत्र में सफलता मिलती है। अधिक सफलता के लिए लाल वस्त्र पहनना चाहिए। मसूर दाल का दान करना चाहिए*।

*वृष- (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो*)—

*इस राशि का चिह्न बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है। इस राशि के जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखते हैं। मंगल का प्रभाव से जातक के अंदर मानसिक गर्मी प्रदान करता है। कल-कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य इस राशि के जातक कर सकते हैं । ये अधिक सौन्दर्य प्रेमी और कला प्रिय होते हैं*।

*क्या करें व्यापर/बिजनेस-–  वृषभ राशि के लोग कला प्रेमी होते हैं, ये लोग एक्टर, सिंगर, ऑटो सेलर, इलेक्ट्रिक  इक्पिमेंट सेलर, नाट्य कला, म्यूजिक के विशारद एवं कॉमर्स, ऑर्ट, पेंटिंग जिओलॉजी के विषय में सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं। इस राशि के लोगों को इन्हीं क्षेत्रों से जुड़े बिज़नेस या ट््रेड में कदम बढ़ाने चाहिए। सफलता की संभावना अधिक रहती है। इस राशि का स्वामी शुक्र होता है, जो वस्त्र एवं किराना बिज़नेस में भी सफलता दिलाता है। अत्यधिक सफलता के लिए इस राशि के लोगों को सफेद वस्त्र पहनना चाहिए*।

*मिथुन- (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह*)—–

*यह राशि चक्र की तीसरी राशि है। राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि के जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखते हैं । नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है। इस राशि के लोगों में ब्रह्माण्ड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है। राहु-शनि का साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है*।

*क्या करें व्यापर/बिजनेस–  इस राशि के लोग अध्यापक, प्रध्यापक, कवि, गीतकार, संगीतकार, प्रवचनकर्ता, ज्योतिषी, गणित,  केमिस्ट्री, जिओलॉजी, अकाउंट, होटल मैनेजमेंट, मैनेजमेंट, फाइनेंस, बैंकिंग के विषय चुन सकते हैं। इस राशि के लोग इस क्षे़त्र में बिज़नेस शुरू कर सकते हैं। अधिक सफलता के लिए मिथुन राशि के लोगों को हरे वस्त्र पहनना, मूंग की दाल का सेवन एवं दान करना चाहिए। सूर्य का पूजन सर्वश्रेष्ठ है*।

*कर्क- (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*–

*राशि चक्र की चौथी राशि कर्क है। इस राशि का चिह्न केकड़ा है। यह चर राशि है। शनि-बुध दोनों मिलकर जातक को होशियार बना देते हैं। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते हैं। शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक आकर्षण देता है। इस राशि के जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाले, जल मार्ग से यात्रा पसंद करने वाले, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों के सेवी और भोगी होते हैं*।

*क्या करें व्यापर/बिजनेस–  इन लोगों के लिए जलीय वस्तु, शक्कर, चावल, चांदी, टीचिंग, वस्त्र, स्त्रियों के वस्त्र, सौंदर्य सामग्री, रंग, उपकरण मरम्मत करना, कॉमर्स, आर्ट, जियोलॉजी, मैनेजमेंट, कम्प्यूटर के विषयों को चयन करना उचित होता है। इनमें नौकरी या इससे जुडे़ बिजनेस इस राशि वालों के लिए उपयुक्त हैं। अत्यधिक सफलता के लिए सफेद वस्त्र पहनें, शिव एवं नारायण को चावल का भोग लगाएं एवं चावल का सेवन करें*।

*सिंह- (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*—-

*सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिह्न शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है। केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावट और सुन्दरता के प्रति आकर्षण को बढ़ाता है। केतु-बुध, कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिए सोच पैदा करता है। चंद्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढ़ाता है। छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते। जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है*।

*क्या करें व्यापर/बिजनेस– – इस राशि के लोग प्रतिभाशाली होते हैं और इनके करीब-करीब सभी बिज़नेस में सफल होने की संभावना रहती है। इस राशि के लोग एडवाइजर, ज्योतिष, इंजीनियर, चिकित्सक, वैज्ञानिक, सेना में ज्यादा सफल होते है।। ये अच्छे मैनेजर होते हैं। इनके लिए बिज़नेस विषय अनुकूल हैं। कॉमर्स, अकाउंट, कानून में अधिक सफलता की संभावना रहती है। अत्यधिक सफलता के लिए आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करें एवं लाल वस्त्र पहनें*

*कन्या- (ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*—

*राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। कन्या राशि के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं। भावुक भी होते हैं और वह दिमाग की अपेक्षा दिल से ज्यादा काम लेते हैं। इस राशि के लोग संकोची, शर्मीले और झिझकने वाले होते हैं। ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंचते हैं। विपरीत परिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकतीं और ये अपनी सूझबूझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस– इस राशि के लोग एजुकेशन, टीचिंग, लेखन, एक्टिंग, म्यूजिक के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं। इनके लिए जिओलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट््री, गणित, अकाउंट के विषय अनुकूल हैं। अत्यधिक सफलता के लिए हरे वस्त्र पहनें। गणेशजी का पूजन करना लाभदायक होता है*।

*तुला- (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*—

*तुला राशि का चिह्न तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, यह वायुतत्व की राशि है। इस राशि वालों को कफ की समस्या होती है। इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है। किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं। ये लोग व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस–  इस राशि के लोगों को एक्टिंग, म्यूजिक, सेना, मैनेजमेंट, ज्यूडिशियरी, बैंक, इन्श्योरेंस, फाइनेंस, मशीनरी, कम्प्यूटर के क्षेत्र में रोजगार या बिज़नेस आजमाना चाहिए। कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, वनस्पतिशास्त्र, गणित के विषयों का चयन करना शुभ होता हैं। अत्यधिक सफलता के लिए नीले वस्त्र पहनें एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें*

*वृश्चिक- (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*

*वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता होती है। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं। शरीरिक गठन भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचूर मात्रा में होती है। इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है, इसलिए कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। ये हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी-कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है। ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस– इन लोगों के लिए सेना, शस्त्र संबंधी कार्य, पुलिस, ज्यूडिशियरी, क्रिमिनल लायर, सोशल सर्विस, राजनीति के क्षेत्र सफलता दिलाने वाले होते हैं। फिजिक्स, गणित, कानून, अकाउंट, राजनीतिशास्त्र, होटल मैनेजमेंट, ह्म्यूमन रिसोर्स के विषय इनके लिए लाभदायक होते हैं। इनसे जुड़े बिजनेस भी इनके लिए उपयुक्त होते हैं। बेहतर सफलता के लिए लाल वस्त्र पहनें या साथ में रखें एवं हनुमानजी को पूजन अर्चना करें*

*धनु-  (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)*

*धनु द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि का चिह्न धनुषधारी है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं। दूसरों के बारे में जानने की कोशिश हमेशा करते रहते हैं। धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। ये निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्यधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं। स्पष्टवादिता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस-– इस राशि के लोगों को नाट्य, ललित कला, गोल्ड सिल्वर बिज़नेस, किराना, सोशल सर्विस, अध्यात्म गुरू, मैनेजर, होटल, स्कूल संचालन के क्षेत्र में सफलता मिलती है। साइंस, गणित, कॉमर्स, अकाउंट एवं सभी विषय अनुकूल होते हैं। बेहतर सफलता के लिए पीले वस्त्र पहनें एवं अपने गुरू के सम्मान के साथ गुरू मंत्र का जाप करें*

*मकर- (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)*

*मकर राशि का चिह्न मगरमच्छ है। मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य कर सकते हैं। इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवनसाथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है। प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपका जीवनसाथी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेता है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है। आप जीवन साथी या मित्रों के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं*।

*क्या करें व्यापर/बिजनेस-– ये लोग मशीनरी, रिपेयरिंग, कम्प्यूटर, सिविल इंजीनियर, आर्किटेक्ट, वास्तु विज्ञानी, गुप्त विद्याओं के जानकार, वैज्ञानिक, अच्छे रिसर्चर होते हैं। इनके लिए गणित, फिजिक्स, केमिस्ट््री, संस्कृत, भाषा, अकाउंट, मैनेजमेंट संबंधी विषय हितकर होते हैं। अत्यधिक सफलता के लिए काले वस्त्र पहनें एवं हनुमानजी को पूजन करें*

*कुंभ- (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*

*राशि चक्र की यह ग्यारहवीं राशि है। कुंभ राशि का चिह्न घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है। इस राशि का स्वामी भी शनि है। शनि मंद ग्रह है तथा इसका रंग नीला है। इसलिए इस राशि के लोग गंभीरता को पसंद करने वाले होते हैं एवं गंभीरता से ही कार्य करते हैं। कुंभ राशि वाले लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतंत्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं। शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रियाकलापों में रुचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता हैं। इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है। आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बातचीत पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं। अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस– इस राशि के कार्य क्षेत्र बहुत कुछ मकर राशि से मिलते-जुलते हैं। क्योंकि दोनों ही राशि का स्वामी शनि है। इसके अलावा सेना, टेक्निकल, मेडिसिन के क्षेत्र भी सफलता दिलाने वाले होते हैं। वनस्पतिशास्त्र, गणित, फार्मा, इलेक्ट््िरक के विषय हितकर होते हैं। बेहतरीन सफलता के लिए काले वस्त्र पहनें एवं दुर्गा एवं हनुमानजी का पूजन करें*

*मीन- (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*

*मीन राशि का चिह्न मछली होता है। मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व आस पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं। आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं। अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं*

*क्या करें व्यापर/बिजनेस-– इन लोगों को अध्यात्म, मेटल विक्रेता, व्हीकल, इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट के सेलर, गुप्तचर विभाग, फायर सर्विस, ज्यूडिशियरी में सफलता मिलती है। गणित, साइंस एवं कॉमर्स के सभी विषय तकनीकी विषय भी लाभकारी होते हैं। अत्यधिक सफलता के लिए पीले वस्त्र पहनें एवं शिव का पूजन करें*

*नोट-  किसी योग्य  ज्योतिष कार से एक बार आपकी एक बार आपकी जन्म पत्रिका अवश्य दिखावा ले*
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 *अधिक जानकारी के लिए E-mail पर संपर्क करें*
 *राष्ट्रीय धर्माचार्य प जगदीश भरद्वाज*
 *दुर्गा उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*mantartantrasamadhan@gmail.com

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चमत्कारी वनस्पति इंद्रजाल


*चमत्कारी वनस्पति इंद्रजाल*

*आज हम बात कर रहे हैं इंद्रजाल नामक वनस्पति की। अपने नाम के अनुरूप ही ये भी बेहद जादुई और रहस्यमयी है। बेचने वाले कहते हैं इंद्रजाल सफेद लाल और पीला तीन रंग का आता है जो गलत है या कहिये उन्हें इससे अधिक पता ही नहीं है वो सिर्फ सुनी सुनाई बातें बता रहे हैं*

*इंद्रजाल एक वनस्पति है जो समुद्रों में शैवालों मूंगे की चट्टानों और समुद्र की तलहटी में बेहद गहराई में पायी जाती है*

*ये डेढ़ दर्जन से अधिक रंगों में पायी जाती है और दुनिया भर के समुद्रों में इसकी 500 से अधिक् प्रजातियां अभी तक ज्ञात हैं*

*इसका आकार शिराओं की भांति लहरदार लकीरों के रूप में होता है।  प्रजाति के अनुरूप*
*कुछ में शिराओं के मध्य समस्त स्थान खाली रहता है तो कुछ की शिराओं में रोयेंदार भराव भी होता है*

*मित्रो यह एक दिव्य वनस्पति हैं जो बहोत ही कम  पायी जाती हैं , मित्रों यह वनस्पति जिसके  पास होती हैं उसे तो वारेन्यारे हो जाते हैं , सुख शांति , और बरकत के मार्ग खुल जाते हैं इस वनस्पति को विशेष तंत्र प्रणाली से सिद्ध कर के घर की दिवार पर लगा दिया जाये तो भूतो प्रेतों के हमले से बचा जा सकता हैं , किसी की मुठ करनी , बाधा तंत्र मंत्र असर नहीं करता , ऊपरी परायी बला नहीं सताती  एवं वास्तु दोषो का शमन करती हैं  मगर वो वनस्पति सिद्ध की  होनी चाहिए अन्यथा  इसका इस्तेमाल एक आम लकड़ी के सामान हैं , और ज्यादा क्या लिखू इस वनपस्ति के बारे में ये वनस्पति अपने आप में दिव्यता समेटे हुए हैं। .. जब आप इसे उपयोग में लाएंगे तब आपको यकीं हो जायेगा के वाकई कुछ चीज पायी हैं हमने। .हमारे यहाँ इस वनस्पति को पूर्णतः तंत्र प्रणाली से साधक के नाम से सिद्ध कर के दिया जाता हैं*

*इसे रखने का सबसे अच्छा तरीका है इसे फ्रेम करवाकर रखना जिससे ये सुरक्षित भी रहता है और प्रभाव में कोई कमी नहीं आती*

*ये लक्ष्मी और भौतिक सुख प्रदान करने वाला माना जाता है। भारत में जहां इसे तंत्र से जोड़कर देखते हैं वहीँ पश्चिम में ये मात्र सजावट की वस्तु है पर बेहद महंगी*

*मिस्र में इसे सुख समृद्धि और उन्नति का प्रतिक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार*

*सिद्ध इंद्रजाल को अपने पास रखने से नजरदोष, ऊपरी बाधा, नकारात्मक शक्तियों और जादू टोने का प्रभाव  आदि का प्रभाव क्षीण होता है*

*यह प्रबल आकर्षण शक्ति संपन्न है*

*अभिमन्त्रित कर ताबीज़ में भर कर धारण करने से सर्वजन पर वशीकरण प्रभाव होता है*

*रवि पुष्य नक्षत्र, नवरात्र, होली दीपावली इत्यादि शुभ समय में मंत्रों से इंद्रजाल वनस्पति को मंत्रों से अभिमंत्रित कर साधक अपने कर्मक्षेत्र में और अध्यात्मिक क्षेत्र में लाभ प्राप्त कर सकता है*

*घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियों भूत प्रेत आदि का प्रवेश नहीं होता । वास्तु दोषों का नाश होता है*

*रोगी व्यक्ति के दक्षिण दिशा में लगाने से मृत्यु भय नहीं होता और उत्तर में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है*

*दुकान व्यापार स्थल के दक्षिण दिशा में लगाने से व्यापार में उन्नति होती है और दुश्मनों प्रतिद्वंदियों द्वारा किये कराये के असर से बचाव होता है*

*नोट लेकिन इसका सिद्ध होना बहुत आवश्यक है तभी यह अपना पूर्ण प्रभाव दिखा सकते हैं*

*अधिक जानकारी समस्या समाधान एवम् कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैं*
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*mantartantrasamadhan@gmail.comदुर्गा  उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*

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हत्था जोड़ी विधान


*प्रिय बंधु आज हम एक अद्भुत  वनस्पति  के बारे में आपको जानकारी देंगे  जो अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्ति से संपन्न हुआ जो साक्षात माता चामुंडा का प्रतीक है उस वनस्पति का नाम है हत्था जोड़ी बहुत ही शक्तिशाली व प्रभावकारी वस्तु है*

*यह :-मुकदमा, शत्रु संघर्ष, दरिद्रता आदि के निवारण में बहुत प्रभावी है इसमके जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आयी इसमें वशीकरण को भी अदुभूत शक्ति है* -
*भूत - प्रेत आदि का भय नही रहता यदि इसे तांत्रिक विधि से सिध्द कर दिया जाए तो साधक निष्चित रूप से चामुण्डा देवी का कृपा पात्र हो जाता है यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य में सफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है तांत्रिक वस्तुओं में यह महत्वपूर्ण है* -!
*हत्था जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात चामुंडा देवी का प्रतिरूप है-!यह जिसके पास भी होगी वह अद्भुत रुप से प्रभावशाली होगा !सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा में अत्यंत गुणकारी होता है, हत्था जोड़ी.हमारे तंत्र शास्त्र तथा तन्त्र का प्रयोग करने वालो के लिये एक महत्वपूर्ण वनौषधि के नाम से जानी जाती है। इसके पत्ते हरे रंग के होते है साथ ही यह भी देखा जाता है इन पत्तो के नीचे के हिस्से मे सफ़ेद रंग की परत होती है और इस सफ़ेद हिस्से पर बाल जैसे मुलायम रोंये होते है। इसके ऊपर गुलाब की तरह का फ़ूल आता है कही कही पर फ़ूल मे नीला रंग भी दिखाई देता है। यह प्राय: पंसारियो के पास या राशि रत्न बेचने वालो के पास से प्राप्त कि जा सकती है इसे तांत्रिक सामान बेचने वाले भी अपने पास रखते है*।
*हत्थाजोडी को कर जोडी हस्ताजूडी के नाम से भी जाना जाता है ! इसकी उपज किसी भी पेड की छाया मे तथा नम जमीन मे होती है इसकी जड गोल होती है और रंग काला होता है इसी जड मे हत्था जोडी बनती है।यदि आप खूब मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए इससे सम्बंधित उपाय करने चाहिए।इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घर लाएं। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान में अथवा तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्यय कम होगा।तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है*


*हत्था जोड़ी के कुछ प्रयोग* :-

*१. प्रसव की सुगमता के लिये ग्रामीण इलाको मे इसे चन्दन के साथ घिस कर प्रसूता की नाभि पर चुपड देते है इससे बच्चा आराम से हो जाता है*
*२. गर्भपात करवाने के लिये भी इसे प्रयोग मे लाया जाता है लेकिन इसके आगे के लक्षण बहुत खराब होते है जैसे हिस्टीरिया का मरीज हो जाना*
*३. जब कभी पेशाब रुक जाती है तो इसे पानी के साथ घिसकर पेडू पर लगाने से पेशाब खुल जाता है*
*४. पेट मे कब्ज रहने पर इसको पानी के साथ घिस कर पेट पर चुपडने से कब्जी दूर होने लगती है*.
*५. मासिक धर्म के लिये इसके चूर्ण की पोटली बनाकर योनि मे रखने से शुद्ध और साफ़ मासिक धर्म होने लगता है लेकिन इस कार्य के लिये किसी योग्य डाक्टर या वैद्य की सहायता लेनी जरूरी होती है*.
*६. हत्थाजोडी का चूर्ण पीलिया के बहुत उपयोगी है पीलिया के मरीज को हत्थाजोडी के चूर्ण को शहद के साथ चटाने से लाभ मिलता है - लेकिन इसका चूर्ण शहद के साथ खिलाने के बाद रोगी को कपडा ओढ़ा देना जरूरी होता है जिससे पीलिया का पानी पसीने के रूप में निकलने लगेगा - कुछ समय बाद पसीने को तौलिया से साफ़ कर लेना चाहिये इससे यह समूल रोग नष्ट करने मे सहायक होती है*.
*७. पारा शोधन कि प्रक्रिया में भी हत्थाजोडी को प्रयोग मे लाते है - हत्थाजोडी के चूर्ण को पारे के साथ खरल करते है धीरे धीरे पारा बंधने लगता है - मनचाही शक्ल मे पारे को बनाकर गलगल नीबू के रस मे रख दिया जाता है कुछ समय मे पारा कठोर हो जाता है लेकिन पारा और हत्था जोडी असली हो तभी यह सम्भव है* अन्यथा कुछ हासिल नहीं होता -!
*८. हत्थाजोडी को सिन्दूर मे लगाकर दाहिनी भुजा मे बांधने से कहा जाता है कि वशीकरण होता है*
*९. बिल्ली की आंवर / जेर हत्थाजोडी और सियारसिंगी को सिन्दूर मे मिलाकर एक साथ रखने से कहा जाता है कि भाग्य मे उन्नति होती है*
*१०. यदि बच्चा रोता अधिक है और जल्दी-जल्दी बीमार हो जाता है तो शाम के समय, हत्थाजोडी के साथ रखे लौंग-इलायची को लेकर धूप देना चाहिए*

*यह क्रिया शनिवार के दिन किन कर्यो के अधिक लाभकारी होती है*

*११. किसी भी व्यक्ति से वार्ता करने में साथ रखे तो वो बात मानेगा.*
*१२. जिसको भी वश में करना हो, उसका नाम लेकर जाप करें तो इसके प्रभाव से वह व्यक्ति वशीभूत होगा*.
*१३. त्रि - धातु के तावीज में गले में धारण करने से बलशाली से बलशाली व्यक्ति भी डरता है. सभी कार्यों में निरंतर निर्भय होता है*
*१४. प्रयोग के बाद चांदी की डिबिया में सिन्दूर के साथ ही तिजोरी में रख दें*

*नोट-  मंत्र द्वारा हत्था जोड़ी चेतन होना आवश्यक है*
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श्वेतार्क गणपति साधना



*आज  बंधुओं हम आपको   श्वेतार्क के बारे में कुछ जानकारी देना चाहते हैं श्वेतार्क का पौधा  अमूमन सभी जगह उपलब्ध होता है इसे लोग घर में भी लगाते हैं घर में  श्वेतार्क की पूजा करने से धन-धान्य आदि की वृद्धि होती है तथा घर में सुख और शांति प्रदान होती है भगवान गणेश की कृपा हमेशा उस घर में बनी रहती है बंधुओं श्वेतार्क के पुराने पौधे में कई बार खोदने पर भगवान गणपति की मूर्ति निकलती है   श्वेतार्क के पौधे को रवि पुष्य नक्षत्र गुरु पुष्य नक्षत्र में विधि विधान के अनुसार निकालना चाहिए फिर भगवान गणेश जी की विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा पूजा कर सिंदूर लगाकर मंत्रों द्वारा सिद्धियां प्रदान करने से सकल कामनाओं की सिद्धि प्रदान होती  है*

*चतुर्भुज रक्तनुंत्रिनेत्रं पाशाकुशौ मोदरक पात्र दन्तो, करैर्दधयानं सरसीरूहस्थं गणाधि नामंराशि चू यडमीडे*

 *गणेश पूजन में लाल वस्त्र धारण करके लाल आसन, लाल पुष्प, लाल चंदन,  लाल चंदन यह मूंगे की माला माला से पूजन तथा नैवेद्य में गुड़ तथा  बेसन  के लड्डू अर्पण करके निम्न मंत्र का जप करें। देव की कृपा साधक को अवश्य ही मिलेगी। ओम गं गणपतए नमः सरल से उपाय श्वेतार्क तंत्र पर पाठकों के लाभार्थ दे रहा हूँ। सहज, सुलभ होने के कारण कोई भी इनको सरलता से अपनाकर लाभ उठा सकता है*

*1. सफेद आक के फूलों से शिव पूजन करें, भोले बाबा की कृपा होगी*

*2. आक की जड़ रविपुष्य नक्षत्र में लाल कपड़े में लपेटकर घर में रख लें, घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी*

*3. श्वेतार्क के नीचे बैठकर प्रतिदिन साधना करें, जल्दी फल मिलेगा*

*4. वृक्ष के नीचे बैठकर प्रतिदिन 'ऊँ गं गणपतये नमः' की एक माला जप करें, हर क्षेत्र में लाभ मिलेगा*

*5. श्वेतार्क की जड़, गोरोचन तथा गोघृत में घिसकर तिलक किया करें, वशीकरण तथा सम्मोहन में इससे त्वरित फल मिलेगा*

*6. होलिका में श्वेतार्क की जड़ तथा छोटे से एक शंख की राख बनाकर रख लें। इससे नित्य तिलक किया करें, दुर्भिक्षों से रक्षा होगी*

*7. श्वेतार्क से गणपति की प्रतिमा बनाकर घर में स्थापित करें। नित्य एक दूर्वाघास अर्पण कर श्रद्धापूर्वक गणपति जी का ध्यान किया करें, प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी तथा सब प्रकार के विघ्नों से आपकी रक्षा होगी*

*8. श्वेतार्क के पत्ते पर अपने शत्रु का नाम इसके ही दूध से लिखकर जमीन में दबा दिया करें, वह शांत रहेगा। इस पत्ते को जल प्रवाह कर दें तो शत्रु आपको छोड़कर और कहीं चला जाएगा। इस पत्ते से यदि होम करते हैं तब तो शत्रु का भगवान ही मालिक है*

*9. श्वेतार्क के फल से निकलने वाली रुई की बत्ती तिल के तेल के दीपक में जलाकर लक्ष्मी साधनाएँ करें, माँ की आप पर कृपा बनी रहेगी*

*10. श्वेतार्क की जड़, मूंगा, फिटकरी, लहसुन तथा मोर का पंख एक थैली में सिल लें। यह एक नजरबट्टू बन जाएगा। बच्चे के सोते समय चौंकना, डरना, रोना आदि में यह बहुत लाभदायक सिद्ध होगा*

*11. सफेद आक की जड़, गणेश चतुर्थी से अनन्त चतुर्दशी तक नित्य 'ऊँ गं गणपतये नम'मंत्र से पूजा करें, सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होगी तथा मनोवांछित कामनाएं पूर्ण होंगी*

*12. श्वेतार्क व़ृक्ष पर नित्य 'ऊँ नमो विघ्नहराय गं गणपतये नमः' मंत्र जप करते हुए मिश्रित जल से अर्ध्य दिया करें, दुष्ट ग्रह शांत होंगे*

*13. सिंदूर मिश्रित चावल के आसन पर श्वेतार्क गणपति जी को विराजमान कर लें। हल्दी, चन्दन, धूप, दीप, नैवेद्य से देव की पूजा करें। नित्य गणपति स्तोत्र का पाठ किया करें, धन-धान्य का अभाव नहीं रहेगा*

*14. श्वेतार्क की जड़ 'ऊँ नमो अग्नि रूपाय ह्रीं नमः' मंत्र जपकर पास रख लें, यात्रा में दुर्घटना का भय नहीं रहेगा*

*15. श्वेतार्क की समिधाओं में ' ऊँ जूं सः रुं रुद्राय नमः सः जूँ ऊँ' मंत्र जपते हुए हवन सामग्री होम किया करें रोग-शोक का नाश होने लगेगा*

*16. पूर्णिमा की रात्रि सफेद आक की जड़ तथा रक्तगुंजा को बकरी के दूध में घिसकर तिलक करें और 'ऊँ  सर्वलोक वंशकरि दुष्टान वशं कुरू कुरू (अमुकं) में वशमानय स्वाहा' मंत्र का जप करें। अमुक के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम जप करें जिसको वश में करना है*

 *इसके अलावा  श्वेतार्क और भी बहुत कार्य में काम आता है उसकी जानकारी अधिक मैया नहीं बता सकता श्वेतार्क कार्य सिद्धि का एक अद्भुत खजाना है लेकिन विधि विधान सिद्धि और औषधि के द्वारा ही कार्य सिद्ध होता है*
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 *अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें*

*राष्ट्रीय धर्माचार्य पं जगदीश भरद्वाज*
 *दुर्गा उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*
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सर्वकामनापूर्ति श्रीकाली चैटक मंत्र

  मंत्र - ॐ कंकाली महाकाली केलि कलाभ्याम स्वाहा !! विधान -शुभ दिन से प्रारम्भ करें! ब्राम्हचार्य व्रत का पालन करते हुए,काला आसान और काले रंग...