मंगलवार, 3 सितंबर 2019

गोमती चक्र



*जय मां दुर्गे मित्रों आज हम आपको गोमती चक्र के बारे में गुरु कृपा से कुछ अदभुत जानकारियां देने की कोशिश कर रहे हैं गोमती चक्र तांत्रिक क्रिया में अब्बल नंबर की एक वस्तु है इससे समस्त कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं व्यापार में वृद्धि रोग नाश वास्तु दोष वशीकरण आपका शरण शत्रु शमन आदि बहुत अच्छे कार्य हैं कुछ जानकारियां मैं आपको नीचे दे रहा हूं लेकिन गोमती चक्र जीवित अवस्था में ही आपको लेना है जिसकी पहचान मैं आपको जानकारी दे रहा हूं फिर उसको सिद्ध कर लेना चाहिए*

*कैसे पता लगाएं की गोमती चक्र जीवित है या निर्जीव*
*जीवित गोमती चक्र को पहचानने के लिए दो तरीके है पहला ये की जब आप जीवित गोमती चक्र के ऊपर थोड़ा सा सिरका डालेंगे तो उस में से छोटे छोटे बुलबुले पैदा होंगे और दूसरा आप गोमती चक्रो को जोड़ो में रख दें उनको ऐसे रखना है की वो आपस में टच न करें फिर उनके ऊपर थोड़ा थोड़ा सिरका डाल दें और सुबह होने पर जो जीवित गोमती चक्र होंगे वो आपस में जुड़ जायेंगे और जो निर्जीव होंगे वो अकेले रहेंगे*

*गोमती चक्र के उपयोग*

*1. जब भी कोई नयी ईमारत बनाई जाती है चाहे वो रहने के लिए या फिर व्यवसाय के लिए तो ईमारत बनाते समय एक गोमती चक्र को उसकी नींव में दबा दिया जाता है || ऐसा करने से उस ईमारत में रहने वाले सभी लोगों का भाग्य उदय होता है और ईमारत को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता*



*2. गोमती चक्र को लाल कपडे में बांधकर चावलों में या गेंहू में रख दिया जाता है ऐसा करने से घर में कभी अनाज की कमी नहीं होती और घर में खुशियां आती है*


*3. दीवाली के दिन माँ लक्ष्मी जी के पूजन के साथ गोमती चक्र रखा जाता है ऐसा करने से हमेशा माँ लक्ष्मी जी की कृपा बानी रहती है और धन प्राप्ति होती है*

*4. अगर किसी की कोख बांध दी गयी हो और उसको बच्चा न हो रहा हो या फिर बार बार गर्भ गिर जाता हो तो कपडे में लपेट कर गोमती चक्र उस महिला की कमर पर बांध दें ऐसा करने से बहुत जल्द बच्चा हो जायेगा*

*5. अगर किसी इंसान की कुंडली में सर्प दोष बनता है और वो सर्प दोष से मुक्ति प्राप्त करना चाहता है तो वो इंसान गोमती चक्र को अभिमंत्रित करके अपने गले में पहनने से काल सर्प दोष और सर्प दोष से मुक्ति पा सकता है*

*6. गोमती चक्र को अपने घर के अंदर दबाने से सभी तरह के वास्तु दोष दूर होते हैं*

*7. अपने शत्रु से पीछा छुड़वाने के लिए एक गोमती चक्र पर उसका नाम लिखकर गोमती चक्र को जमीं में गाड़ दें ऐसा करने से आपका शत्रु परास्त हो जायेगा*

*8. घर में अगर लड़ाई झगड़ा रहता है तो गोमती चक्र को एक सिन्दूर की डब्बी में रखकर डब्बी को घर के अंदर रख लें ऐसा करने से घर में शांति और खुशियां बरक़रार रहती हैं*

*9. जिस इंसान की शादी में बाधा आ रही है या फिर शादी नहीं हो रही वो गोमती चक्र को श्री कृष्ण जी की मूर्ति के साथ रखकर सात दिन लगातार पूजा करे तो बहुत जल्दी शादी हो जाएगी*

*10. अगर आपकी नौकरी नहीं लग रही या फिर उन्नति नहीं हो रही तो दो गोमती चक्र अपनी जेब में रखकर इंटरव्यू दें तो आपकी नौकरी लग जाएगी या फिर अपनी जेब में रखकर कार्यस्थल जाएं तो बहुत जल्दी उन्नति हो जाएगी*
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 *अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें*
*राष्ट्रीय धर्माचार्य पंडित जगदीश भारद्वाज दुर्गा उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*
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सोमवार, 2 सितंबर 2019

सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र



*🌷जय मां दुर्गे 🌷प्रिय भक्तों आज हम आपको मां भगवती दुर्गा का गुरुदेव की कृपा से बता रहे हैं सौतन से छुटकारा पाने के लिए आप सौतन से छुटकारा मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं   नीचे कुछ मंत्र बताए गए हैं जिन्हे आप एक बार जरूर आजमा कर देखें और  किसी योग्य पंडित से जन्मपत्रिका दिखाकर  कुग्रहों का प्रभाव को भी दूर करवा लेना चाहिए | ये मंत्र हैं*

*🌷ओम् द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नमः”.. शुक्र मंत्र के इस पाठ का प्रतिदिन जाप करें एक माला*

*ओम् दुँ दुर्गायै अमुकं ( सौतन का नाम ) उच्चाटय उच्चाटय शीघ्रं सर्व शत्रु बाधा नाशय नाशय फट्*
*इस मंत्र का जाप करें | जाप आरंभ कर अष्टमी को किसी भी कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली | इसे आप किसी शनिवार को भी कर सकते हैं | रात्रि के ग्यारह बजे के उपरांत इस जाप को आरंभ करें* *इसके लिए सबसे पहले शुद्ध होकर आप अपने सामने स्थापित करें श्री दुर्गा यंत्र को | स्वयं लाल वस्त्र को धारण करें और आसन भी लाल रंग का ही रखें | अपना मुख दक्षिण दिशा की तरफ रखें | फिर थोड़ा सा जल अपने हाथ में लेकर यह संकल्प करें कि, “मैं अमुक (अपना नाम) साधक, आमुक (सौतन या जिससे पीछा छुटाना हो का नाम ) स्त्री से अपने पती/प्रेमी/प्रेमिका के प्रति उच्चाटन के लिए यह साधना कर रही/रहा हूं | आपने आने वाले भविष्य में मेरे परिवार या मेरी सुख और शांति को कोई भी तरह से खत्म ना कर सकें | जय माता दुर्गा ,मुझे आशीर्वाद दो |” यह संकल्प करने के बाद हाथ में लिए हुए जल को जमीन पर गिरा दें | अगर संभव है तो जिससे अपने प्रिय का पीछा छुड़ाना हो उसकी तस्वीर को अपने सामने रखें | यह सब करने के बाद एक मूंगें की माला द्वारा ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें  पांच माला | इस साधना को लगातार  सात दिनों तक करें | उसके बाद दुर्गा यंत्र को स्थापित कर दें अपने पूजा स्थल पर | चित्र और मूंगे की माला को गड्ढा खोडकर जमीन के नीचे दबा दें किसी सुनसान जगह में उसके बाद मां दुर्गा का एक छोटा सा  हवन भी करें शीध्र ही फल की प्राप्ति होगी*
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 *अधिक जानकारी के लिए संपर्क   करें*
*राष्ट्रीय धर्माचार्य पं जगदीश भारद्वाज*
*दुर्गा उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*mantartantrasamadhan@gmail.com
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संकट मुक्ति हनुमान साधना


*🙏जय मां दुर्गे  आज हम हनुमान जी महाराज के मंत्र के बारे में आपको अपने ज्ञान के अनुसार छोटी जानकारी देना चाहते हैं कलयुग में हनुमान जी महाराज प्रत्यक्ष भूमि पर निवास करते हैं हनुमान जी महाराज अजर अमर है मां भगवती राजराजेश्वरी सीता मैया उन्हें वरदान प्राप्त है अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता भी भगवान शिव के 11 अवतार हैं इसलिए हनुमान जी की विधि और विधान के साथ अनुष्ठान किया जाए या किसी योग्य पंडित से करवाया जाए विश्वास और  श्रद्धा के साथ तो अवश्य आपके कार्य में सिद्धि होकर मनोरथ पूर्ण होगा उसका एक प्रयोग मंत्र आपको गुरु कृपा से यहां मैं बताने जा रहा हूं इसका प्रयोग करने से  शक्ल कामना में सिद्धि होती है उसके द्वारा कुछ प्रयोग भी किए जा सकते हैं जो मैं आपको नीचे लिख रहा हूं  यह हनुमान जी महाराज की अचूक प्रयोग है इसलिए किसी योग्य गुरु के आदेश अनुसार करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा क्योंकि बिना गुरु के कोई भी कार्य संभव  नहीं होता इस अनुष्ठान में तन मन से स्वच्छ रहना आवश्यक है ब्रह्मचर्य पालन भी करना आवश्यक है*

*🌷रोग, ग्रहदोष, शत्रुपीड़ा, ऊपरी बाधा आदि से मुक्ति और शत्रु पर विजय कोर्ट कचहरी मुकदमे में विजय हेतु प्रयोग*
*मंत्र*-

*🌷1-ऊँ ऐं श्रीं ह्रीं ह्रीं हं ह्रौं ह्रः ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत-पिशाच ब्रह्म राक्षस शाकिनी डाकिनी यक्षिणी पूतना मारी-महामारी राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकान् क्षणेन हन हन, भंजय भंजय मारय मारय, शिक्षय शिक्षय महा-महेश्वर रुद्रावतार ऊँ हुम् फट स्वाहा। ऊँ नमो भगवते हनुमदाख्याय रुद्राय सर्व दुष्टजन मुख स्तम्भनं कुरु स्वाहा। ऊँ ह्रीं ह्रीं हं ह्रौं ह्रः ऊँ ठं ठं ठं फट् स्वाहा*

*विधि: मंगलवार को व्रत रखें और सूर्यास्त के समय पूर्ण विधि से हनुमानजी की मंदिर में पूजा करें। फिर उक्त मंत्र का  11, हजार बार जप करें और अर्धरात्रि के पश्चात् दशांश हवन करें। यह प्रयोग  11 दिन  तक करने से कार्य सिद्ध हो जाता है। प्रतिद्वंद्वी को परास्त करने के लिए इस मंत्र का विशेष महत्व है इसके द्वारा बहुत कार्य सिद्ध किए जाते हैं जिनकी कुछ जानकारी आपको मैं नीचे दे रहा हूं सिर्फ हवन सामग्री में परिवर्तन किया जाता है*


*मंत्र की प्रयोग विधि*:
*हनुमान जी के मंदिर के समीप स्थित बरगद या पीपल के वृक्ष की छोटी-छोटी चार टहनियां ले लें और उसी मंदिर में हनुमान जी के समक्ष रखकर उक्त मंत्र का एक माला (108 बार) जप करें और टहनियां घर ले आएं। अगले दिन पुनः उन टहनियों को लेकर उसी मंदिर में जाएं, 108 बार उक्त मंत्र का जप करें और पुनः वापस ले आएं। ऐसा 16 दिन करें। सत्रहवें दिन उन टहनियों को अपने घर या दुकान या कार्यालय के चारों दिशाओं में गाड़ दें। एक बार में सिर्फ चार टहनियां ही अभिमंत्रित करें। यह प्रयोग स्वयं करे, किसी अन्य व्यक्ति से न कराए*
*हनुमान जी को लाल धागे में बनी लाल फूलों की माला चढ़ाएं। फिर वहीं मंदिर में बैठकर उक्त मंत्र का तीन हजार दो सौ बार जप करें। फिर उस माला फूलों को सावधानी से निकाल कर मंदिर की दहलीज पर रख दें और लाल धागा घर ले आएं। रात्रि में 10 बजे के बाद उक्त धागे में सात बार बारी बारी से मंत्र बोलकर सात गांठ लगाएं। फिर इस माला को हाथ अथवा गले में धारण करें, संकटों से रक्षा होगी*
*एक नींबू, पांच साबुत सुपारियां, एक हल्दी की गांठ, काजल की डिबिया, 16 साबुत काली मिर्च, पांच लौंग तथा रुमाल के आकार का लाल कपड़ा घर या मंदिर में एकांत में बैठ जाएं। उक्त मंत्र का 108 बार जप करके उक्त सामग्री को लाल कपड़े में बांध लें। इस पोटली को घर या दुकान के मुख्य द्वार पर लगा दें, संकटों से मुक्ति मिलेगी। इस प्रयोग से कर्मचारियों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है और स्थायित्व भी आ जाता है*
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 *अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें*
*राष्ट्रीय धर्माचार्य पं जगदीश भारद्वाज*
*दुर्गा पासकू वासु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*mantartantrasamadhan@gmail.com
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सियार सिंगी


*🙏जगदंबिके दुर्गायै नम🙏* *धन-सम्पति, वशीकरण, शत्रु शमन मुकदमें विजय व्यापार में वृद्धि शत्रु द्वारा तंत्र मंत्र से  सुरक्षा इसकी जितनी प्रशंसा  करू उतना ही कम है  क्योंकि यह अद्भुत शक्ति संपन्न है मे व्यक्ति सशक्त ही जाता है l जिस व्यक्ति के पास यह होती है l उसे किसी बात कि कमी नहीं होती l उसकी सारी इच्छाये अपने आप पूरी हो जाती है लेकिन किसी योग्य विद्वान के द्वारा इसे सिद्ध करवा ले या विधि के अनुसार आप सब सिद्ध कर लें तभी यह समस्त कार्य करने में संपन्न होगी दूसरा इसका ओरिजिनल होना बहुत जरूरी है बाजार में नकली या बहुत मिलती हैं सही जानकार के द्वारा ही से खरीदें और ले लो कि नकली कोई कार्य नहीं करेगी*

*सियार सिंगी से धन प्राप्ति*

*अगर व्यापार न चल पा रहा हो या जीवन में उन्नति न हो पा रही हो तो इस साधना को करना चाहिए. कई बार इर्ष्या के कारण कुछ लोग तंत्र प्रयोग कर देते हैं जिससे दूकान में ग्राहक नहीं आते यां कार्य सफल नहीं होते. इन परस्थितियों में भी यह प्रयोग राम बाण की तरह असर करता है*.

*बुधवार के दिन सियार सिंगी को किसी स्टील की प्लेट में स्थापित कर दें. इस पर कुंकुम या केसर का तिलक लगाये. फिर इस पर चावल और फूल अर्पित करें और निम्न मंत्र का जप आसन में बैठ कर करें :- “ॐ नमो भगवती पद्मा श्रीम ॐ हरीम, पूर्व दक्षिण उत्तर पश्चिम धन द्रव्य आवे, सर्व जन्य वश्य कुरु कुरु नमः*

*इस मंत्र का मात्र 108 बार जप 21 दिन इस सियार सिंगी के सामने करें. 21 दिन के बाद इसको किसी डिब्बी में संभल कर रख ले. अगर दूकान न चल रही हो तो दूकान में किसी सुरक्षित स्थल में रख दे और केवल २१ बार इस मंत्र का उच्चारण करें. इस पाधना को करने वाले को कभी धन की याचना नहीं करनी पार्टी अपितु धन उसकी और स्वयं ही आकर्षित होता रहता है*



 *अगर प्रेमी यां प्रेमिका का मन बदल गया हो , या विवाह करने को राज़ी न हो रहे हों*

*कोई अधिकारी आपके विरोध में कार्य कर रहा हो*,
*परिवार में कोई सदस्य गलत रास्ते पर जा रहा हो तो वशीकरण प्रयोग से उसका मन बदला जा सकता है*

*पति- पत्नी या परिवार के किसी अन्य सदस्य से न बनती हो और झगडे होते हों और घर में अगर कलह रहती हो तो वशीकरण से आपस में विवाद ख़तम किये जा सकते हैं*

*शुक्रवार के दिन जिस भी व्यक्ति स्त्री या पुरुष को अपने अनुकूल करना हो उसका नाम कुमकुम से स्टील की प्लेट पर लिखें , अगर उसका चित्र हो तो नाम के ऊपर उसका चित्र रख दें* । *अब इसके ऊपर सियार सिंगी को स्थापित करें । सियार सिंगी पर केसर का तिलक लगाये। अब इस पर चावल और पुष्प चढ़ा दें। इसके बाद इसपर हिना की इत्र लगायें । मिठाई का भोग अर्पित करे*.

*अब निम्न मंत्र का जप १०८ बार करें*

*बिस्मिलाह मेह्मंद पीर आवे घोडे की सवारी , पवन को वेग मन को संभाले, अनुकूल बनावे , हाँ भरे , कहियो करे , मेह्मंद पीर की दुहाई , शब्द सांचा पिण्ड कांचा फुरो मंत्र इश्वरो वाचा*

*इस प्रकार मात्र 21 दिन तक करें . 21 दिन के बाद सियार सिंगी को चित्र के साथ किसी लाल कपडे में बांध कर रख ले. जब तक वह चित्र सियार सिंगी के साथ बंधा रहेगा वोह व्यक्ति आपके अनुकूल रहेगा आपके वश में रहेगा*

 *1- सियार सिंगी वाले सिंदूर से जो भी पुरुष अपनी पत्नी की मांग भरता है या  स्त्री अपनी मांग भरने में सियार सिंगी सिंदूर का प्रयोग करती है तो उसका  पुरुष हमेशा उसके वश में रहता है*
*2- यदि कोई व्यक्ति प्रेत बाधा या  क्रोध से ग्रसित हो तो उसके लिए आपको सियार सिंगी में प्रयोग किए गए चावलों  का उपयोग करना चाहिए उसकी सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है*
*3- सियार  सिंगी में प्रयोग किए गए उड़द के दाने जिस भी घर के दरवाजे में फेंक दिए  जाते हैं वह व्यक्ति एवं वह घर कभी आबाद नहीं हो पाता अर्थात उस व्यक्ति की  और उस घर की तरक्की रुक जाती है*

*4- सियार सिंगी जो भी व्यक्ति अपने पास रखता है उसकी सभी इच्छा पूर्ण हो जाती है एवं उसके घर में सकारात्मक शक्तियों का वास होता है*
 *६- जो भी व्यक्ति सियार सिंगी जो भी व्यक्ति अपने पास रखता है या व्यापार  क्षेत्र में उसको स्थापित करता है उसके व्यापार और नौकरी में हमेशा बरक्कत  और तरक्की होती रहती है*
*७- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मारकेश  की दशा हो अर्थात मृत्यु का दोष हो तो उस व्यक्ति को सियार सिंगी सदैव अपने  पास रखना चाहिए इससे लाभ होता है*
*सियार सिंगी वशीकरण का प्रयोग  बहुत ही प्रबल होता है जिसकी पहचान भी तुरंत की जा सकती है और इसके फायदे  भी बहुत प्रकार के होते है | सियार सिंगी का प्रयोग कर कोई भी कार्य सिद्ध  किया जा सकता है*
 *ॐ नमो भगवते रुद्राणी चमुन्डानी घोराणी सर्व पुरुष क्षोभणी सर्व शत्रु विद्रावणी। ॐ आं क्रौम ह्रीं जों ह्रीं मोहय मोहय क्षोभय क्षोभय,  मम वशी कुरुं वशी कुरुं क्रीं श्रीं ह्रीं क्रीं स्वाहा”।  मंत्र का सियार सिंगी के सामने 1100 बार जप करना होता है। इस प्रकार आप इसे सिद्ध कर पाते है। अपने परिवार निर्वाह और लोगों के भले के लिए उपयोग करें अनर्गल उपयोग ना करें अनर्गल उपयोग करने वाले का दोस्त का भाग्य खुद होगा*
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 *राष्ट्रीय धर्माचार्य पंडित जगदीश भारद्वाज दुर्गा उपासक वास्तु शास्त्री ज्योतिषाचार्य*mantartantrasamadhan@gmail.com

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सर्वकामनापूर्ति श्रीकाली चैटक मंत्र

  मंत्र - ॐ कंकाली महाकाली केलि कलाभ्याम स्वाहा !! विधान -शुभ दिन से प्रारम्भ करें! ब्राम्हचार्य व्रत का पालन करते हुए,काला आसान और काले रंग...